यह ज्ञानी व्यक्ति की बात है कि अकेलेपन से ही, सच्ची बल का विकास होता है। क्योंकि जब हम स्वयं के साथ होते हैं तो हमें आत्म-विश्वास का साधन मिलता है। यह मनोरम दृष्टिकोण हमें समय के प्रति नया दृष्टिकोण प्रदान करता है, जो हमारे अस्तित्व को बदल देता है। एकान्त से उत्कर्ष: आत्म-शक्ति